आबू धाबी, 20 मई। वैश्विक ऊर्जा जगत में बड़ी हलचल मचाते हुए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक से अलग होने की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही समूह के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक की लगभग छह दशक पुरानी सदस्यता समाप्त हो गई।
क्यों लिया यह फैसला
यूएई वर्षों से अपने उत्पादन कोटे को लेकर ओपेक के भीतर असहज रहा है। देश ने अपनी उत्पादन क्षमता में भारी निवेश किया है और वह बाजार हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है, जबकि ओपेक की उत्पादन-कटौती नीति इस महत्वाकांक्षा को सीमित करती रही है। विश्लेषकों के अनुसार, अपनी ऊर्जा नीति पर पूर्ण स्वायत्तता पाना ही इस कदम का मुख्य कारण है।
तेल बाजार पर असर
घोषणा के तुरंत बाद कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया, क्योंकि व्यापारियों ने आपूर्ति की अनिश्चितता का आकलन शुरू कर दिया। यूएई बिना कोटे की बाध्यता के अधिक तेल बाजार में उतार सकता है, जिससे अल्पकालिक रूप से कीमतों पर दबाव बन सकता है। हालांकि बाजार की दीर्घकालिक दिशा ओपेक के बाकी सदस्यों, खासकर सऊदी अरब, की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।