मुख्य सामग्री पर जाएँ
गुरूवार, 04 जून 2026
जन जागरण
ब्रेकिंग
ऐतिहासिक जनादेश: भाजपा ने पहली बार जीता पश्चिम बंगाल, 294 में से 206 सीटें डब्ल्यूएचओ ने घोषित की वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल: कांगो में इबोला से 130 से अधिक की मौत यूएई ने ओपेक छोड़ा, छह दशकों की सदस्यता समाप्त — वैश्विक तेल बाजार में हलचल चक्रवात सदीम का पश्चिम बंगाल पर कहर: नौ की मौत, हजारों विस्थापित पुतिन का बड़ा बयान: "युद्ध समाप्ति की ओर", ज़ेलेंस्की से मुलाक़ात को तैयार पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक जीत, ममता बनर्जी का 15 साल का शासन समाप्त आखिरी गेंद का रोमांच: आरसीबी ने मुंबई इंडियंस को 2 विकेट से हराकर IPL टॉप किया एंथ्रोपिक का "क्लॉड मायथोस" सार्वजनिक रिलीज़ के लिए "बहुत खतरनाक" करार, सिर्फ चुने पार्टनर्स को मिला Canvas/Instructure पर बड़ा साइबर हमला, 8,800 शिक्षा संस्थानों का डेटा प्रभावित WHO ने क्रूज़ शिप पर हंतावायरस का क्लस्टर पुष्ट किया: 8 मामले, 3 मौतें
लाइफस्टाइल

गर्मी से राहत की तलाश: 2026 में हिल स्टेशनों की ओर उमड़ रहे पर्यटक, बजट यात्रा का चलन तेज़

भीषण गर्मी के बीच इस साल भारतीय पर्यटक बड़ी संख्या में हिल स्टेशनों की ओर रुख कर रहे हैं। मनाली, शिमला, मुन्नार, ऊटी, दार्जिलिंग और श्रीनगर जैसे ठंडे ठिकानों पर बुकिंग में जोरदार उछाल देखा जा रहा है।

अजय राज अजय राज 23 मई 2026, 10:24 PM 1 मिनट में पढ़ें 14 बार देखा
गर्मी से राहत की तलाश: 2026 में हिल स्टेशनों की ओर उमड़ रहे पर्यटक, बजट यात्रा का चलन तेज़
गर्मी से राहत के लिए हिल स्टेशनों की ओर पर्यटक (प्रतीकात्मक चित्र)।

नई दिल्ली, मई। देश के मैदानी इलाकों में पड़ रही भीषण गर्मी ने पर्यटकों को पहाड़ों की ठंडी वादियों की ओर खींचा है। गर्मी 2026 में हिल स्टेशनों पर पर्यटन जोरों पर है।

पसंदीदा ठिकाने

इस साल के सबसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में मनाली, शिमला, मुन्नार, ऊटी, दार्जिलिंग और लेह-लद्दाख शामिल हैं। डल झील, मुगल गार्डन और हाउसबोट के लिए मशहूर श्रीनगर भी पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है।

बदलते यात्रा चलन

आज के भारतीय यात्री सामान खरीदने के बजाय अनुभवों को प्राथमिकता दे रहे हैं — वेलनेस रिट्रीट, एडवेंचर टूरिज्म और प्रकृति के बीच समय बिताने की मांग तेज़ी से बढ़ी है। साथ ही बजट यात्रा का चलन भी जोर पकड़ रहा है; हिमालय, पश्चिमी घाट और पूर्वोत्तर में 18 से अधिक ऐसे हिल स्टेशन हैं जहां 2,500 रुपये प्रति रात से कम में ठहरने की सुविधा उपलब्ध है।

उद्योग पर असर

होटल, रिसॉर्ट और होमस्टे में अधिभोग (ऑक्यूपेंसी) तेज़ी से बढ़ा है, जबकि एयरलाइंस पर्यटन स्थलों के लिए नए घरेलू मार्ग और उड़ानें जोड़ रही हैं। पर्यटन बोर्ड टिकाऊ यात्रा — प्लास्टिक का कम उपयोग, स्थानीय समुदायों का सहयोग और पर्यावरण संरक्षण — को बढ़ावा दे रहे हैं ताकि पहाड़ी पारिस्थितिकी सुरक्षित रहे।

स्रोत: Travel industry coverage
शेयर: Facebook Twitter WhatsApp
अजय राज
द्वारा लिखित
अजय राज
Editor-in-Chief

जनजागरण के संस्थापक और प्रधान संपादक। पत्रकारिता में 15+ वर्षों का अनुभव, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर पैनी नज़र।

के सभी लेख देखें अजय राज →

टिप्पणियाँ (0)

रोज़ की मुख्य खबरों से जुड़े रहें

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें और कोई खबर न चूकें।