शिकागो, मई। मधुमेह (डायबिटीज) के इलाज में एक उत्साहजनक प्रगति सामने आई है। यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के एक प्रारंभिक क्लिनिकल ट्रायल में टाइप-1 डायबिटीज के सभी 10 शुरुआती प्रतिभागियों को असाधारण परिणाम मिले।
चार हफ्ते में इंसुलिन से आज़ादी
ट्रायल के अनुसार, ये सभी मरीज इलाज के महज चार हफ्तों के भीतर पूरी तरह इंसुलिन-स्वतंत्र हो गए और उनकी जांच रिपोर्ट गैर-मधुमेह वाले व्यक्ति जैसी सामान्य आ गई। खास बात यह कि इनमें से कई औसतन 33 वर्षों से टाइप-1 डायबिटीज के साथ जी रहे थे।
क्यों है यह अहम
टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून स्थिति है जिसमें शरीर इंसुलिन बनाना लगभग बंद कर देता है, और मरीजों को जीवनभर इंसुलिन के इंजेक्शन पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में इंसुलिन से मुक्ति की संभावना करोड़ों मरीजों के लिए जीवन बदलने वाली खबर हो सकती है।