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दक्षिण की सियासत में उथल-पुथल: तमिलनाडु में विजय का उदय, केरल में वाम का पांच दशक पुराना किला ढहा

विधानसभा चुनाव नतीजों ने दक्षिण भारत की राजनीति का नक्शा बदल दिया। तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी ने द्रविड़ दबदबे को चुनौती दी, जबकि केरल में कांग्रेस नीत यूडीएफ की वापसी से वाम मोर्चे का दशकों पुराना गढ़ ढह गया।

राहुल शर्मा राहुल शर्मा 22 मई 2026, 07:45 AM 1 मिनट में पढ़ें 16 बार देखा
दक्षिण की सियासत में उथल-पुथल: तमिलनाडु में विजय का उदय, केरल में वाम का पांच दशक पुराना किला ढहा
दक्षिण भारत की विधानसभाओं में सत्ता समीकरण बदले।

चेन्नई/तिरुवनंतपुरम, 4 मई। दक्षिण भारत की राजनीति ने इस बार कई पुराने समीकरण तोड़ दिए। तमिलनाडु और केरल के विधानसभा चुनाव नतीजों ने क्षेत्रीय सत्ता संतुलन को नए सिरे से परिभाषित किया है।

तमिलनाडु: विजय की एंट्री

लोकप्रिय अभिनेता विजय की राजनीतिक पारी ने तमिलनाडु में दशकों से चले आ रहे दो प्रमुख द्रविड़ दलों के दबदबे को चुनौती दी। हालांकि 51 वर्षीय विजय 234 सदस्यीय विधानसभा में 118 के बहुमत के आंकड़े से करीब 10 सीट पीछे रह गए और सरकार बनाने के लिए उन्हें सहयोगियों की जरूरत होगी।

केरल: वाम का अंत

केरल में कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने 140 में से करीब 98 सीटों पर बढ़त बनाई, जबकि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) 35 सीटों पर सिमटता दिखा। इसके साथ ही पांच दशक से चली आ रही वाम राजनीति का एक बड़ा गढ़ ढह गया।

राष्ट्रीय असर

विश्लेषकों का कहना है कि इन नतीजों के बाद देश में किसी भी राज्य में वाम दलों की सत्ता नहीं बची है — आधुनिक भारतीय राजनीति में यह एक ऐतिहासिक मोड़ है। दक्षिण के इन बदलावों का असर 2029 के राष्ट्रीय परिदृश्य पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

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राहुल शर्मा
द्वारा लिखित
राहुल शर्मा
Senior Political Correspondent

वरिष्ठ संवाददाता, राजनीति और संसदीय कार्य के विशेषज्ञ। दिल्ली ब्यूरो से जुड़े हुए, राष्ट्रीय राजनीति की हर हलचल पर पैनी नज़र रखते हैं।

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