नई दिल्ली, 20 मई। भारत की हवाई सुरक्षा को और पुख्ता करने वाली एक अहम खबर में, रूस निर्मित एस-400 ट्रायम्फ वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली का चौथा स्क्वाड्रन इसी सप्ताह के अंत तक भारतीय वायुसेना को सौंप दिया जाएगा। रक्षा सूत्रों के अनुसार आपूर्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
सौदा और अब तक की आपूर्ति
भारत ने 2018 में रूस के साथ पांच एस-400 स्क्वाड्रन के लिए लगभग 35,000 करोड़ रुपये का समझौता किया था। पहले तीन स्क्वाड्रन पहले ही तैनात किए जा चुके हैं, जिन्हें उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर रणनीतिक रूप से लगाया गया है। चौथे स्क्वाड्रन की डिलीवरी के साथ इस अनुबंध का बड़ा हिस्सा पूरा हो जाएगा।
क्या है एस-400 की ताकत
एस-400 दुनिया की सबसे उन्नत लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणालियों में गिनी जाती है। यह 400 किलोमीटर तक की दूरी और 30 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर लड़ाकू विमानों, ड्रोन, क्रूज़ और बैलिस्टिक मिसाइलों को निशाना बना सकती है। एक ही प्रणाली एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक और भेद सकती है, जिससे यह किसी भी हवाई हमले के विरुद्ध बहुस्तरीय कवच बनाती है।