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अमेरिकी मध्यस्थता वाला संघर्ष विराम समाप्त, रूस-यूक्रेन ने एक-दूसरे पर लगाए आरोप

9-11 मई के संघर्ष विराम के समाप्त होने से पहले ही दोनों पक्षों ने उल्लंघन के आरोप लगाए। पुतिन डोनबास पर कब्ज़े पर अड़े हैं, जबकि ज़ेलेंस्की एक इंच ज़मीन देने को तैयार नहीं। ट्रंप का अगला कूटनीतिक दांव अब बीजिंग में।

अजय राज अजय राज 11 मई 2026, 05:18 PM 1 मिनट में पढ़ें 6 बार देखा
अमेरिकी मध्यस्थता वाला संघर्ष विराम समाप्त, रूस-यूक्रेन ने एक-दूसरे पर लगाए आरोप
यूक्रेनी सैनिक पूर्वी मोर्चे पर तैनात।

मॉस्को/कीव, 11 मई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कराए गए तीन-दिवसीय संघर्ष विराम के सोमवार को समाप्त होने से पहले ही रूस और यूक्रेन ने एक-दूसरे पर इसके उल्लंघन के आरोप लगाए।

दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप

रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि यूक्रेनी सेना ने इस अवधि में कई बार रूसी ठिकानों पर ड्रोन से हमले किए। दूसरी ओर, यूक्रेनी जनरल स्टाफ़ ने कहा कि रूस ने डोनेत्स्क और ज़ापोरिज़्ज़िया दिशा में पैदल सेना के हमले जारी रखे। हालांकि, दोनों ने ही प्रिज़नर एक्सचेंज के लिए ज़मीन पर समन्वय बनाए रखा, जिसमें 1,000 कैदियों की अदला-बदली हुई।

डोनबास पर गतिरोध

शांति समझौते का सबसे बड़ा रोड़ा डोनबास क्षेत्र पर पुतिन का दावा है। रूसी राष्ट्रपति चाहते हैं कि लुहान्स्क और डोनेत्स्क ओब्लास्ट्स के पूरे क्षेत्र को रूसी संप्रभुता के तहत मान्यता दी जाए। ज़ेलेंस्की का रुख है कि वे "एक इंच यूक्रेनी ज़मीन भी सरेंडर नहीं करेंगे" और संविधान संशोधन के बिना यह संभव भी नहीं है।

यूरोप की भूमिका

ब्रसेल्स में आपात बैठक में यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों ने सहमति जताई कि किसी भी शांति समझौते की गारंटी के लिए यूरोपीय सुरक्षा बल भी ज़मीन पर तैनात किए जाने चाहिए। ब्रिटेन और फ्रांस ने इस "रिआश्योरेंस फोर्स" का नेतृत्व करने का प्रस्ताव दिया है।

ट्रंप का बीजिंग दांव

व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, ट्रंप 14-15 मई को बीजिंग में शी जिनपिंग से मुलाक़ात के दौरान यूक्रेन का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे। उम्मीद है कि चीन की मदद से रूस पर अप्रत्यक्ष दबाव डाला जा सकता है।

ज़मीन पर हालात

संघर्ष विराम के बावजूद यूक्रेन के पूर्वी मोर्चे पर लड़ाई अब तीसरे साल में प्रवेश कर चुकी है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, 2022 में युद्ध की शुरुआत से अब तक 50,000 से अधिक नागरिक मारे जा चुके हैं और 1.4 करोड़ से अधिक विस्थापित हुए हैं।

स्रोत: Washington Times
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अजय राज
द्वारा लिखित
अजय राज
Editor-in-Chief

जनजागरण के संस्थापक और प्रधान संपादक। पत्रकारिता में 15+ वर्षों का अनुभव, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर पैनी नज़र।

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