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केरल में यूडीएफ की प्रचंड जीत, पांच दशकों में भारत में कहीं भी वामपंथी सरकार नहीं

140 में से 102 सीटों के साथ कांग्रेस-नेतृत्व वाला यूडीएफ केरल में सत्ता में आया। एलडीएफ 35 तक सिमटा, पिनरायी विजयन ने इस्तीफा सौंपा।

अजय राज अजय राज 11 मई 2026, 12:36 AM 1 मिनट में पढ़ें 1 बार देखा
केरल में यूडीएफ की प्रचंड जीत, पांच दशकों में भारत में कहीं भी वामपंथी सरकार नहीं
केरल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जश्न।

तिरुवनंतपुरम, 4 मई। केरल विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों ने राज्य की राजनीति में बड़ा फेरबदल किया। कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने 140 में से 102 सीटें जीतकर सत्ता पर वापसी की।

एलडीएफ की हार

लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) मात्र 35 सीटों पर सिमट गया। निवर्तमान मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने 5 मई को इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया। कांग्रेस ने अकेले 63 सीटें जीतीं — उसकी 25 वर्षों की सर्वश्रेष्ठ संख्या।

भारत में वामपंथी सरकार का अंत

यह पांच दशकों में पहली बार है जब भारत के किसी राज्य में वामपंथी सरकार नहीं होगी। केरल में 2016 से एलडीएफ की सरकार थी। 1957 में राज्य ने दुनिया का पहला लोकतांत्रिक तरीक़े से चुना गया कम्युनिस्ट सरकार बनाई थी।

हार के कारण

विश्लेषकों के अनुसार एलडीएफ की हार के पीछे मुख्य वजहें थीं: स्वर्ण तस्करी मामला, कथित परिवारवाद (विजयन की बेटी वीणा से जुड़े विवाद), विप्रेषण-आश्रित अर्थव्यवस्था पर बढ़ती चिंता और राज्य के बढ़ते कर्ज़।

नए मुख्यमंत्री की दौड़

कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री पद के लिए वी.डी. सतीसन, के.सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के नाम चर्चा में हैं। पार्टी आलाकमान ने एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई है। शपथ ग्रहण 15 मई तक होने की संभावना है।

राष्ट्रीय राजनीति पर असर

कांग्रेस के लिए केरल की जीत 2029 लोकसभा चुनावों से पहले एक बहुत आवश्यक मनोबल-वर्धक है। पार्टी अब वहां "बेहतर शासन" का मॉडल प्रस्तुत करने पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रासंगिकता मज़बूत हो।

स्रोत: Al Jazeera
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अजय राज
द्वारा लिखित
अजय राज
Editor-in-Chief

जनजागरण के संस्थापक और प्रधान संपादक। पत्रकारिता में 15+ वर्षों का अनुभव, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर पैनी नज़र।

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