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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.79 अरब डॉलर घटकर 690.69 अरब डॉलर पर

आरबीआई के अनुसार 1 मई को समाप्त सप्ताह में बड़ी गिरावट। विदेशी निवेशकों की निकासी और रुपए पर दबाव बने रहने से यह कमी आई। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि स्थिति जल्द संभलने की उम्मीद है।

अजय राज अजय राज 11 मई 2026, 06:45 AM 1 मिनट में पढ़ें 2 बार देखा
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.79 अरब डॉलर घटकर 690.69 अरब डॉलर पर
भारतीय रिज़र्व बैंक का मुख्यालय, मुंबई।

मुंबई, 8 मई। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 1 मई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.794 अरब डॉलर घटकर 690.693 अरब डॉलर रह गया।

हाल के महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट

यह पिछले छह महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावटों में से एक है। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 7.2 अरब डॉलर कम हुईं, स्वर्ण भंडार 0.5 अरब डॉलर घटा, और आईएमएफ रिज़र्व पोज़िशन में मामूली कमी आई।

रुपए पर दबाव

गिरावट का मुख्य कारण रुपए पर बढ़ता दबाव और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की भारतीय इक्विटी और बॉन्ड बाज़ारों से निकासी है। मई की शुरुआत में रुपया डॉलर के मुक़ाबले 84.50 के स्तर तक कमज़ोर हुआ था। आरबीआई ने रुपए की रक्षा के लिए डॉलर बेचे, जिसकी वजह से भंडार कम हुआ।

आरबीआई गवर्नर का आश्वासन

आरबीआई गवर्नर ने मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के बाद कहा कि "विदेशी पूंजी निकासी अस्थायी है और परिसंपत्ति मूल्यांकन में सुधार के साथ धीमी हो जाएगी।" उप-गवर्नर पूनम गुप्ता ने टिप्पणी की कि "भारत की दीर्घकालिक निवेश कहानी का बाज़ार सही मूल्यांकन नहीं कर रहा।"

क्यों हो रही है निकासी

विश्लेषक तीन कारण गिनाते हैं: (1) अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज़ दर ऊंची रखने का संकेत, (2) चीन-केंद्रित निवेश का उभार, और (3) भारत-पाकिस्तान तनाव की वर्षगांठ से जुड़ी अस्थायी जोखिम-धारणा। ये सभी कारक एफपीआई को सावधान बना रहे हैं।

आगे का रास्ता

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में रिज़र्व 685-695 अरब डॉलर के बीच रहेगा। आरबीआई के पास अभी भी पर्याप्त बफ़र है — मौजूदा भंडार भारत के 11 महीनों के आयात को कवर करता है। यह IMF के अनुशंसित न्यूनतम स्तर से कहीं ज़्यादा है।

स्रोत: Business Standard
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अजय राज
द्वारा लिखित
अजय राज
Editor-in-Chief

जनजागरण के संस्थापक और प्रधान संपादक। पत्रकारिता में 15+ वर्षों का अनुभव, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर पैनी नज़र।

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