कोलकाता, 11 मई। पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की पहली कैबिनेट बैठक में सोमवार को एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया — सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी के लिए राज्य की भूमि का हस्तांतरण किया जाएगा। यह कार्य 45 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
15 साल पुराने रुख का अंत
यह निर्णय पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 15 वर्षों के लगातार विरोध को पलट देता है। बनर्जी पारंपरिक रूप से तटीय और सीमावर्ती समुदायों के विस्थापन का हवाला देकर इस तरह की बाड़बंदी का विरोध करती रही हैं। नई सरकार ने इसे "राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता" बताते हुए तत्काल पूर्ववत किया।
2,217 किमी लंबी सीमा का चुनौतीपूर्ण विस्तार
पश्चिम बंगाल भारत-बांग्लादेश सीमा का सबसे लंबा खंड साझा करता है — 2,217 किलोमीटर। इसका बड़ा हिस्सा सुंदरबन की दलदली ज़मीन, नदी मुहाने और पतले गलियारों से होकर गुज़रता है, जिससे बाड़बंदी और निगरानी मुश्किल हो जाती है। शेष लगभग 350 किमी हिस्से में बाड़ अभी भी अधूरी है।
बांग्लादेश की प्रतिक्रिया
बीएसएफ की इस घोषणा के बाद बांग्लादेश की सीमा रक्षक बाहिनी (बीजीबी) उच्चतम सतर्कता पर है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने चेतावनी दी है कि यदि "घुसपैठियों को धकेलने" की कथित कार्रवाइयां बढ़ती हैं तो ढाका "उचित कदम" उठाएगा। हाल के महीनों में बीएसएफ और बीजीबी के बीच कई सीमावर्ती घटनाएं दर्ज की गई हैं।