केंद्रीय मंत्रिमंडल ने क्रिस्टल मैट्रिक्स और सूचि सेमिकॉन की दो इकाइयों को मंजूरी दी। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत अब तक कुल 12 चिप संयंत्र स्वीकृत हो चुके हैं और 2,230 कुशल नौकरियां पैदा होने का अनुमान।
नई दिल्ली, 5 मई। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को गुजरात में दो नई सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों को मंजूरी दे दी, जिनमें कुल मिलाकर लगभग 3,936 करोड़ रुपए का निवेश होगा। यह कदम भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा बनाने की दिशा में एक और बड़ी छलांग है।
दो प्रमुख परियोजनाएं
पहली परियोजना के तहत क्रिस्टल मैट्रिक्स धोलेरा में एकीकृत कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब और एसेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग एवं पैकेजिंग (ATMP) सुविधा स्थापित करेगी। इसमें गैलियम नाइट्राइड (GaN) तकनीक का उपयोग करते हुए भारत की पहली व्यावसायिक मिनी/माइक्रो-LED डिस्प्ले इकाई भी शामिल होगी।
दूसरी इकाई सूचि सेमिकॉन की होगी, जो विशेष श्रेणी के चिप्स बनाने पर केंद्रित होगी। दोनों परियोजनाओं से अगले तीन वर्षों में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन की रफ्तार
इन दो इकाइयों के साथ ही इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के तहत अब तक स्वीकृत चिप संयंत्रों की कुल संख्या 12 हो गई है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर ले।
2,230 नौकरियां और सहायक उद्योग
सरकार के अनुमान के अनुसार, इन दोनों परियोजनाओं से 2,230 कुशल नौकरियों का प्रत्यक्ष सृजन होगा। इसके अलावा, सहायक उद्योगों — विशेष रसायन, गैस आपूर्ति, क्लीनरूम उपकरण और लॉजिस्टिक्स — में हज़ारों अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा होंगे।
गुजरात क्यों केंद्र बन रहा है
गुजरात में बेहतर बुनियादी ढांचा, पहले से स्थापित आईएसएम परियोजनाएं और राज्य सरकार की प्रोत्साहन नीति ने इसे चिप निर्माण का प्रमुख केंद्र बना दिया है। धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (एसआईआर) में पहले से ही टाटा, माइक्रोन और सीजी पावर की परियोजनाएं चल रही हैं।
आगे की राह
आत्मनिर्भर भारत के तहत डिज़ाइन-लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजनाएं चिप निर्माण को रफ्तार दे रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि भारत अब अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाद चौथा सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर डिजाइन हब बनने की दिशा में है।