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लांसेट ATLAS मेटा-विश्लेषण: 24 घंटे तक बड़े-कोर स्ट्रोक के लिए थ्रोम्बेक्टॉमी फायदेमंद

छह क्लिनिकल ट्रायलों के 1,886 मरीजों के डेटा का पूलिंग। RESCUE-Japan, ANGEL-ASPECT, SELECT2, TENSION, TESLA और LASTE ट्रायल्स का परिणाम।

राहुल शर्मा राहुल शर्मा 08 मई 2026, 12:09 PM 1 मिनट में पढ़ें 1 बार देखा
लांसेट ATLAS मेटा-विश्लेषण: 24 घंटे तक बड़े-कोर स्ट्रोक के लिए थ्रोम्बेक्टॉमी फायदेमंद
मस्तिष्क MRI स्कैन।

लंदन, 7 मई। द लांसेट में 7 मई 2026 को प्रकाशित ATLAS व्यक्तिगत-रोगी-डेटा मेटा-विश्लेषण ने तीव्र इस्केमिक स्ट्रोक के उपचार में एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष पेश किया है।

छह ट्रायलों का संयुक्त विश्लेषण

शोधकर्ताओं ने छह बड़े ट्रायल्स — RESCUE-Japan LIMIT, ANGEL-ASPECT, SELECT2, TENSION, TESLA, और LASTE — के 1,886 मरीजों के डेटा को पूल किया। यह स्ट्रोक अनुसंधान के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा मेटा-विश्लेषण है।

24 घंटों के भीतर लाभ

तीव्र अग्र संचार स्ट्रोक के मरीजों में 24 घंटे के भीतर एंडोवस्कुलर थ्रोम्बेक्टॉमी ने मेडिकल मैनेजमेंट की तुलना में कार्यात्मक परिणामों में महत्वपूर्ण सुधार किया और मृत्यु दर कम की। यह पिछले 6-घंटे की समय-सीमा से आगे का बड़ा विस्तार है।

क्या है थ्रोम्बेक्टॉमी

थ्रोम्बेक्टॉमी एक न्यूनतम आक्रामक प्रक्रिया है जिसमें कैथेटर के माध्यम से ब्लड क्लॉट को हटा दिया जाता है। यह सर्जरी के बिना मस्तिष्क की रक्त आपूर्ति को बहाल करती है। भारत में लगभग 200 अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध है।

निष्कर्ष की मज़बूती

लाभ ASPECTS और इस्केमिक-कोर श्रेणियों में बना रहा; साक्ष्य केवल 6 घंटे से अधिक की कोर वॉल्यूम >=150 mL के लिए सीमित रहा। अध्ययन के प्रमुख लेखक प्रोफेसर कीथ डब्ल्यू. म्यूर ने कहा, "यह स्ट्रोक उपचार दिशानिर्देशों में बड़े-कोर स्ट्रोक थ्रोम्बेक्टॉमी की पात्रता का विस्तार करने का समर्थन करता है।"

भारत के लिए प्रासंगिकता

भारत में हर साल लगभग 18 लाख स्ट्रोक के मामले होते हैं, जिनमें से एक तिहाई की मौत हो जाती है और एक तिहाई स्थायी विकलांगता का सामना करते हैं। AIIMS दिल्ली और कोलकाता के बंगुर इंस्टीट्यूट ऑफ़ न्यूरोलॉजी जैसे संस्थानों ने स्वागत किया है।

दिशानिर्देशों में बदलाव

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) और यूरोपीय स्ट्रोक ऑर्गनाइज़ेशन (ESO) ने 2026 के अंत तक अपने दिशानिर्देश अद्यतन करने की घोषणा की है। इसका मतलब है कि लाखों मरीज़ अब उपचार के लिए पात्र होंगे।

स्रोत: The Lancet
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राहुल शर्मा
द्वारा लिखित
राहुल शर्मा
Senior Political Correspondent

वरिष्ठ संवाददाता, राजनीति और संसदीय कार्य के विशेषज्ञ। दिल्ली ब्यूरो से जुड़े हुए, राष्ट्रीय राजनीति की हर हलचल पर पैनी नज़र रखते हैं।

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